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Tuesday, October 26, 2021

CURRENT AFFAIRS OF UPSC, BPSC, SSC, OTHER EXAM PREPARE 2021-2022

                                     CA (CURRENT AFFAIRS) 26 OCT 
शासन व्यवस्था

आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन

     Star marking (1-5) indicates the importance of topic for CSE
  • 26 Oct 2021
  •  
  • 4 min read

प्रिलिम्स के लिये :

आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन

मेन्स के लिये:

आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के उद्देश्य और महत्व 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में प्रधानमंत्री ने आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन का शुभारंभ किया।

प्रमुख बिंदु

  • परिचय:
    • यह देश भर में स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढाँचे  को मज़बूत करने के लिये सबसे बड़ी अखिल भारतीय योजनाओं में से एक है।
    • यह 10 'उच्च फोकस' वाले राज्यों में 17,788 ग्रामीण स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों को सहायता प्रदान करेगा और देश भर में 11,024 शहरी स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र स्थापित करेगा।
    • इसके माध्यम से देश के पाँच लाख से अधिक आबादी वाले सभी ज़िलों में एक्सक्लूसिव क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक के माध्यम से क्रिटिकल केयर सेवाएँ उपलब्ध होंगी, जबकि शेष ज़िलों को रेफरल सेवाओं के माध्यम से कवर किया जाएगा।
    • इस योजना के अंतर्गत एक स्वास्थ्य पहल  के लिये एक राष्ट्रीय संस्थान, वायरोलॉजी हेतु चार नए राष्ट्रीय संस्थान,दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में डब्ल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) का एक क्षेत्रीय अनुसंधान मंच, नौ जैव सुरक्षा स्तर- III प्रयोगशालाएँ और रोग नियंत्रण के लिये पाँच नए क्षेत्रीय राष्ट्रीय केंद्र स्थापित किये जाएंगे।
  • उद्देश्य:
    • शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में एक मज़बूत सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचा  सुनिश्चित करना, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के अंतर्गत आपातकालीन स्थितियों या बीमारी के प्रकोप से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
    • ब्लॉक,ज़िला, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी प्रयोगशालाओं के नेटवर्क के माध्यम से एक आईटी-सक्षम रोग निगरानी प्रणाली स्थापित करना।
      • सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं को एकीकृत स्वास्थ्य सूचना पोर्टल के माध्यम से जोड़ा जाएगा, जिसका विस्तार सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में किया जाएगा।
  • महत्त्व:
    • भारत को लंबे समय से एक व्यापक स्वास्थ्य प्रणाली की आवश्यकता है। वर्ष 2019 में लोकनीति-CSDS (Lokniti-CSDS) द्वारा किये गए एक अध्ययन ['दक्षिण एशिया में लोकतंत्र की स्थिति (SDSA)-राउंड 3'] में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि कैसे हाशिये पर रहने वालों को  सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच के नाम पर भ्रमित किया जा रहा है।
      • अध्ययन में पाया गया कि 70% स्थानों पर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएँ हैं। हालाँकि शहरी क्षेत्रों (87%) की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों (65%) में उपलब्धता कम थी।
    • स्वच्छ भारत मिशनजल जीवन मिशनउज्ज्वलापोषण अभियानमिशन इंद्रधनुष जैसी योजनाओं ने करोड़ों लोगों को बीमारी से बचाया है। आयुष्मान भारत योजना के तहत 2 करोड़ से अधिक गरीबों को निःशुल्क इलाज मिला और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।
  • अन्य संबंधित पहलें:

स्रोत: द हिंदू


सामाजिक न्याय

नशीली दवाओं की लत और भारत

     Star marking (1-5) indicates the importance of topic for CSE
  • 26 Oct 2021
  •  
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये: 

गोल्डन ट्रायंगल, गोल्डन क्रिसेंट, नार्को-समन्वय केंद्र, मादक पदार्थों के नियंत्रण के लिये राष्ट्रीय कोष

मेन्स के लिये: 

भारत में नशीली दवाओं की लत से संबंधित समस्या और सरकार द्वारा इस संबंध में किये गए प्रयास

चर्चा में क्यों?

हाल ही में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने सिफारिश की है कि 'मादक पदार्थों के नियंत्रण के लिये राष्ट्रीय कोष' का उपयोग केवल पुलिसिंग गतिविधियों के बजाय नशामुक्ति कार्यक्रमों के संचालन हेतु किया जाना चाहिये।

  • ‘नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस’ (NDPS) अधिनियम, 1985 में परिभाषित दवाओं की अल्प मात्रा को अपराध मुक्त करने का प्रस्ताव भी वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग को भेजा गया था।
    • इसे मंज़ूरी मिलने के पश्चात् व्यक्तिगत उपयोग के लिये अल्प मात्रा में नशीली दवाओं के साथ पकड़े गए व्यक्तियों पर मुकदमा चलाने और जेल भेजने के बजाय उन्हें पुनर्वास के लिये निर्देशित किया जाएगा।

प्रमुख बिंदु

  • मादक पदार्थों के नियंत्रण के लिये राष्ट्रीय कोष
    • यह कोष ‘नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस’ (NDPS) अधिनियम, 1985 के प्रावधान के अनुसार बनाया गया था, जिसमें 23 करोड़ रुपए की राशि शामिल है।
    • NDPS अधिनियम के तहत ज़ब्त की गई किसी भी संपत्ति की बिक्री से प्राप्त आय, किसी व्यक्ति और संस्था द्वारा किये गए अनुदान तथा फंड के निवेश से होने वाली आय, फंड में शामिल की जाएगी।
    • अधिनियम के मुताबिक, इस फंड का उपयोग नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी, नशा पीड़ित लोगों के पुनर्वास और नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिये किया जाएगा।

Iran

  • भारत में नशीली दवाओं की लत:
    • भारत के युवाओं के बीच नशे की लत तेज़ी से फैल रही है।
      • भारत विश्व के दो सबसे बड़े अफीम उत्पादक क्षेत्रों (एक तरफ ‘गोल्डन ट्रायंगल’ और दूसरी तरफ ‘गोल्डन क्रिसेंट’) के बीच स्थित है।
      • ‘गोल्डन ट्रायंगल’ क्षेत्र में थाईलैंड, म्याँमार, वियतनाम और लाओस शामिल हैं।
      • ‘गोल्डन क्रिसेंट’ क्षेत्र में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान शामिल हैं।
      • वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2021 के अनुसार, भारत (विश्व में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा निर्माता) में प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाओं और उनके अवयवों को मनोरंजक उपयोग के साधनों में तेज़ी से परिवर्तित किया जा रहा है।
      • भारत वर्ष 2011-2020 में विश्लेषण किये गए 19 प्रमुख डार्कनेट (काला बाज़ारी) बाज़ारों में बेची जाने वाली दवाओं के शिपमेंट से भी जुड़ा हुआ है।
    • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की ‘क्राइम इन इंडिया- 2020’ रिपोर्ट के अनुसार, NDPS अधिनियम के तहत कुल 59,806 मामले दर्ज किये गए थे।
    • सामाजिक न्याय मंत्रालय और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की 2019 में मादक द्रव्यों के सेवन की मात्रा पर जारी रिपोर्ट के अनुसार, 
      • भारत में 3.1 करोड़ भांग उपयोगकर्त्ता हैं (जिनमें से 25 लाख आश्रित उपयोगकर्त्ता थे)।
      • भारत में 2.3 करोड़ ओपिओइड उपयोगकर्त्ता हैं (जिनमें से 28 लाख आश्रित उपयोगकर्त्ता थे)।
  • अन्य संबंधित पहलें:
    • नार्को-समन्वय केंद्र: नार्को-समन्वय केंद्र (NCORD) का गठन नवंबर 2016 में किया गया था और "नारकोटिक्स नियंत्रण के लिये राज्यों को वित्तीय सहायता" योजना को पुनर्जीवित किया गया था।
    • जब्ती सूचना प्रबंधन प्रणाली: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को एक नया सॉफ्टवेयर यानी जब्ती सूचना प्रबंधन प्रणाली (SIMS) विकसित करने के लिये धन उपलब्ध कराया गया है जो नशीली दवाओं के अपराध और अपराधियों का एक पूरा ऑनलाइन डेटाबेस तैयार करेगा।
    • नेशनल ड्रग एब्यूज़ सर्वे: सरकार एम्स के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर की मदद से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के माध्यम से भारत में नशीली दवाओं के दुरुपयोग के रुझानों को मापने हेतु राष्ट्रीय नशीली दवाओं के दुरुपयोग संबंधी सर्वेक्षण भी कर रही है।
      • प्रोजेक्ट सनराइज़: इसे स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 2016 में भारत में उत्तर-पूर्वी राज्यों में बढ़ते एचआईवी प्रसार से निपटने के लिये शुरू किया गया था, खासकर ड्रग्स का इंजेक्शन लगाने वाले लोगों के बीच।
    • NDPS अधिनियम: यह व्यक्ति को किसी भी मादक दवा या मनोदैहिक पदार्थ के उत्पादन, रखने, बेचने, खरीदने, परिवहन, भंडारण और/या उपभोग करने से रोकता है।
      • NDPS अधिनियम में अब तक तीन बार संशोधन किया गया है - 1988, 2001 और 2014 में।
      • यह अधिनियम पूरे भारत के साथ-साथ भारत के बाहर के सभी भारतीय नागरिकों और भारत में पंजीकृत जहाज़ो एवं विमानों पर कार्यरत सभी व्यक्तियों पर भी लागू होता है।
    • नशा मुक्त भारत: सरकार ने 'नशा मुक्त भारत' या ड्रग मुक्त भारत अभियान शुरू करने की भी घोषणा की है जो सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रमों पर केंद्रित है।
  • नशीली दवाओं के खतरे का मुकाबला करने के लिये अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ और सम्मेलन:

आगे की राह 

  • नशीली दवाओं के सेवन से जुड़े कलंक को समाप्त करने के लिये समाज को यह समझने की ज़रूरत है कि नशा करने वाले अपराधी नहीं बल्कि पीड़ित होते हैं।
  • कुछ दवाएँ जिनमें 50% से अधिक अल्कोहल और ओपिओइड शामिल होता है, को सामान्य दवाओं के अंतर्गत शामिल किये जाने की आवश्यकता है। देश में नशीली दवाओं की समस्या पर अंकुश लगाने के लिये पुलिस अधिकारियों और आबकारी विभाग को सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।
  • बिहार में शराबबंदी जैसा राजनीतिक फैसला इसका दूसरा समाधान हो सकता है. जब लोग आत्म-नियंत्रण नहीं कर पाते हैं, तो राज्य को राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (अनुच्छेद 47) के तहत कदम उठाना पड़ता है।
  • शिक्षा पाठ्यक्रम में मादक पदार्थों की लत, इसके प्रभाव और नशामुक्ति पर भी अध्याय शामिल होने चाहिये। उचित परामर्श एक अन्य विकल्प है।

स्रोत: द हिंदू


भारतीय राजनीति

राजनीतिक दलों का लोकतंत्रीकरण

  • 26 Oct 2021
  •  
  • 14 min read

यह एडिटोरियल 23/10/2021 को इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित “How to democratise the party” लेख पर आधारित है। इसमें भारत में राजनीतिक दलों के कार्यकरण को लोकतांत्रिक बनाने की आवश्यकता के संबंध में चर्चा की गई है।

संदर्भ

लोकतांत्रिक सिद्धांत में प्रक्रियात्मक लोकतंत्र (Procedural Democracy) और वास्तविक लोकतंत्र (Substantive Democracy) दोनों शामिल हैं। यहाँ प्रक्रियात्मक लोकतंत्र से तात्पर्य सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, आवधिक चुनाव, गुप्त मतदान आदि के अभ्यास से है, जबकि वास्तविक लोकतंत्र राजनीतिक दलों—जो कथित तौर पर लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं, के आंतरिक लोकतांत्रिक कार्यकरण को संदर्भित करता है।     

वर्तमान में भारतीय राजनीति के समक्ष विद्यमान विभिन्न प्रासंगिक चुनौतियों की जड़ें उम्मीदवारों के चयन और दलीय चुनावों में ’इंट्रा-पार्टी/अंतरा-दलीय लोकतंत्र’ की कमी में ढूँढी जा सकती हैं ।  

राजनीतिक दलों में लोकतंत्र की आवश्यकता

  • प्रतिनिधित्त्व: ’इंट्रा-पार्टी/अंतरा-दलीय लोकतंत्र’ के अभाव ने राजनीतिक दलों को संकीर्ण निरंकुश संरचनाओं में बदल दिया है। यह नागरिकों के राजनीति में भाग लेने और चुनाव लड़ सकने के समान राजनीतिक अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। 
  • गुटबाजी में कमी: इससे मज़बूत ज़मीनी संपर्क या जनाधार रखने वाले नेता को दल में दरकिनार नहीं किया जा सकेगा। जिससे पार्टी के भीतर गुटबाजी और विभाजन का खतरा कम हो जाएगा। उदाहरण के लिये भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस (INC) छोड़कर शरद पवार ने राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) और ममता बनर्जी ने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) का गठन कर लिया था।   
  • पारदर्शिता: पारदर्शी प्रक्रियाओं के साथ एक पारदर्शी दलीय संरचना, उपयुक्त टिकट वितरण और उम्मीदवार चयन को बढ़ावा देगी। ऐसे चयन पार्टी के कुछ शक्तिशाली नेताओं की इच्छा पर आधारित नहीं होंगे, बल्कि वे समग्र रूप से पार्टी की पसंद का प्रतिनिधित्त्व करेंगे।
  • उत्तरदायित्त्व: एक लोकतांत्रिक दल अपने सदस्यों के प्रति उत्तरदायी होगा, क्योंकि अपनी कमियों के कारण वे आगामी चुनावों में हार सकते हैं।
  • सत्ता का विकेंद्रीकरण: प्रत्येक राजनीतिक दल की राज्य और स्थानीय निकाय स्तर की इकाइयाँ होती हैं। दल में प्रत्येक स्तर पर चुनाव का आयोजन विभिन्न स्तरों पर शक्ति केंद्रों के निर्माण का अवसर देगा। इससे सत्ता या शक्ति का विकेंद्रीकरण हो सकेगा और ज़मीनी स्तर पर निर्णय लिये जा सकेंगे।      
  • राजनीति का अपराधीकरण: चूँकि भारत में चुनाव से पूर्व उम्मीदवारों को टिकटों के वितरण हेतु कोई सुव्यवस्थित प्रक्रिया मौजूद नहीं है, इसलिये उम्मीदवारों को बस उनके ‘जीत सकने की क्षमता’ की एक अस्पष्ट अवधारणा के आधार पर टिकट दिये जाते हैं। इससे धनबली-बाहुबली अथवा आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के चुनाव मैदान में उतरने की अतिरिक्त समस्या उत्पन्न हुई है।    

लोकतंत्र की कमी के कारण

  • वंशवाद की राजनीति: अंतरा-दलीय लोकतंत्र की कमी ने राजनीतिक दलों में भाई-भतीजावाद (Nepotism) की प्रवृति में योगदान दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा अपने परिवार के सदस्यों को चुनाव मैदान में उतारा जा रहा है।     
  • राजनीतिक दलों की केंद्रीकृत संरचना: राजनीतिक दलों के कार्यकरण का केंद्रीकृत स्वरूप और वर्ष 1985 में अधिनियमित दल-बदल विरोधी कानून, राजनीतिक दलों के निर्वाचित सदस्यों को राष्ट्रीय और राज्य विधानमंडलों में अपने व्यक्तिगत पसंद या विवेक से मतदान करने से अवरुद्ध करता है।     
  • कानून की कमी: वर्तमान में भारत में राजनीतिक दलों के आंतरिक लोकतांत्रिक विनियमन के लिये कोई स्पष्ट प्रावधान मौजूद नहीं है और एकमात्र शासी कानून ‘लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ की धारा 29A द्वारा प्रदान किया गया है, जो भारतीय निर्वाचन आयोग में राजनीतिक दलों के पंजीकरण का प्रावधान करता है। हालाँकि, राजनीतिक दलों द्वारा अपने पदाधिकारियों के चयन हेतु नियमित रूप से आंतरिक चुनाव आयोजित किये जाते हैं, किंतु किसी दंडात्मक प्रावधान के अभाव में यह अत्यंत सीमित ही है।     
  • व्यक्ति पूजा: प्रायः आम लोगों में नायक पूजा की प्रवृत्ति होती है और कई बार पूरी पार्टी पर कोई एक व्यक्तित्व हावी हो जाता है जो अपनी मंडली बना लेता है, जिससे सभी प्रकार के अंतरा-दलीय लोकतंत्र का अंत हो जाता है। उदाहरण के लिये माओत्से तुंग का चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पर आधिपत्य या अमेरिका में रिपब्लिक पार्टी पर डोनाल्ड ट्रंप का प्रभाव।       
  • आंतरिक चुनावों को अप्रभावी करना: पार्टी में शक्ति समूहों द्वारा अपनी सत्ता को मज़बूत करने और यथास्थिति बनाए रखने के लिये आंतरिक संस्थागत प्रक्रियाओं को नष्ट करना बेहद सरल है।

अनुशंसाएँ

  • विधि आयोग: चुनावी कानूनों के सुधार पर भारतीय विधि आयोग की 170वीं रिपोर्ट में एक पूरा अध्याय राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र के लिये कानूनों की आवश्यकता को समर्पित किया गया है।
    • आयोग ने माना था कि कोई राजनीतिक दल, जो अपने आंतरिक कार्यकरण में लोकतांत्रिक सिद्धांतों का सम्मान नहीं करता है, उससे देश के शासन में मौजूद आधारभूत सिद्धांतों का सम्मान करने की आशा और अपेक्षा नहीं की जा सकती है।
  • NCRWC रिपोर्ट: ’राष्ट्रीय संविधान कार्यकरण समीक्षा आयोग’ (National Commission for Review of Working of Constitution- NCRWC) ने माना है कि भारत में राजनीतिक दलों या गठबंधनों के पंजीकरण और कार्यकरण के विनियमन हेतु एक व्यापक विधायी व्यवस्था होनी आवश्यक है।   
  • द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग रिपोर्ट: प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC) की द्वितीय रिपोर्ट (नैतिकता और शासन) ने उल्लेख किया है कि भ्रष्टाचार मुख्यतः अति-केंद्रीकरण के कारण ही होता है, क्योंकि जनता से जितनी दूर रहकर शक्ति का उपभोग किया जाता है, अधिकारिता और उत्तरदायित्त्व के बीच उतना ही व्यापक अंतराल होता है।  

आगे की राह

  • आंतरिक चुनाव की अनिवार्यता के लिये कानून का निर्माण: यह राजनीतिक दलों का कर्तव्य है कि सभी स्तरों पर चुनाव आयोजन सुनिश्चित करने हेतु उचित कदम उठाए जाएँ। राजनीतिक दलों को निर्वाचन आयोग द्वारा नामित पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में राष्ट्रीय और राज्य स्तर के आंतरिक चुनाव संपन्न कराने चाहिये।       
  • दल-बदल विरोधी कानून में संशोधन: ‘दल-बदल विरोधी कानून, 1985’ पार्टी के निर्वाचित सदन सदस्यों को पार्टी ‘व्हिप’- जो शीर्ष नेतृत्त्व के फरमानों पर तय होते हैं, के अनुरूप कार्य करने को बाध्य करता है। राजनीतिक दलों में लोकतंत्रीकरण को बढ़ावा देने का एक उपाय यह है कि अंतरा-दलीय असंतोष को अभिव्यक्त कर सकने का अवसर प्रदान किया जाना चाहिये।  
    • दल-बदल विरोधी कानून को केवल उन मामलों में प्रयोग किया जाना चाहिये, जब अविश्वास प्रस्ताव जैसे अत्यंत महत्त्वपूर्ण अवसरों पर वे पार्टी व्हिप के विरुद्ध मतदान करते हैं।
  • आरक्षण: महिलाओं, अल्पसंख्यकों और पिछड़े समुदाय के सदस्यों के लिये सीटें आरक्षित की जा सकती हैं।    
  • वित्तीय पारदर्शिता/लेखापरीक्षा: सभी राजनीतिक दलों के लिये यह अनिवार्य किया जाना चाहिये कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने व्यय का विवरण भारतीय निर्वाचन आयोग को प्रस्तुत करें। समय पर या निर्धारित प्रारूप में ये विवरण जमा नहीं करने वाले राजनीतिक दलों पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिये।   
  • भारतीय निर्वाचन आयोग को सशक्त बनाना: 
    • निर्वाचन आयोग को आंतरिक चुनाव की आवश्यकता संबंधी किसी भी प्रावधान के गैर-अनुपालन के आरोपों की जाँच कर सके।  
    • गैर-अनुपालन के लिये दंड की व्यवस्था: यदि राजनीतिक दल स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से चुनाव आयोजित नहीं करते हैं, तो ऐसी स्थिति में निर्वाचन आयोग के पास दल का पंजीकरण रद्द करने की दंडात्मक शक्ति होनी चाहिये।

निष्कर्ष

राजनीति को राजनीतिक दलों से पृथक रखकर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि वे ही देश में लोकतंत्र के क्रियान्वयन के प्रमुख माध्यम होते हैं। राजनीतिक दलों के भीतर आंतरिक लोकतंत्र और पारदर्शिता का प्रवेश वित्तीय और चुनावी जवाबदेही को बढ़ावा देने, भ्रष्टाचार को कम करने और समग्र रूप से देश के लोकतांत्रिक कार्यकरण में सुधार लाने हेतु महत्त्वपूर्ण है।       

यह आवश्यक है कि राजनीतिक दल चुनावी राजनीतिक सुधारों की लगातार बढ़ती मांगों पर विचार करें और अंतरा-दलीय लोकतंत्र लाने की दिशा में कदम उठाएँ। 

अभ्यास प्रश्न: “भारत में राजनीतिक दलों का लोकतंत्रीकरण भारतीय राजनीति के लोकतंत्रीकरण का मार्ग प्रशस्त करेगा।” टिप्पणी कीजिये।


शासन व्यवस्था

राष्ट्रीय संचालन समिति: निपुण भारत मिशन

  • 26 Oct 2021
  •  
  • 5 min read

प्रिलिम्स के लिये:

निपुण भारत मिशन

मेन्स के लिये:

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और शिक्षा में सुधार से संबंधित मुद्दे 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में निपुण भारत मिशन के कार्यान्वयन के लिये एक राष्ट्रीय संचालन समिति (NSC) का गठन किया गया है।

  • निपुण (राष्ट्रीय समझ और संख्यात्मकता के साथ पढ़ने में प्रवीणता के लिये राष्ट्रीय पहल) भारत योजना इस साल की शुरुआत में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के हिस्से के रूप में शुरू की गई थी।

प्रमुख बिंदु 

  • NSC की भूमिका और उत्तरदायित्व:
    • मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता पर राष्ट्रीय मिशन की प्रगति की निगरानी करना और नीतिगत मुद्दों पर मार्गदर्शन प्रदान करना।
    • 2026-27 में राष्ट्रीय स्तर पर हासिल किये जाने वाले लक्ष्य पर पहुँचना।
    • दिशा-निर्देशों के रूप में वार्षिक प्रगति के मापन के लिये उपकरणों का प्रसार करना।
    • राष्ट्रीय कार्य योजना (राज्य की कार्य योजनाओं के आधार पर) तैयार करना और अनुमोदन करना।
    • कार्यक्रम संबंधी और वित्तीय मानदंडों की समय-समय पर समीक्षा करना ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे हासिल किये जाने वाले लक्ष्यों के साथ संतुलन स्थापित कर रहे हैं।
  • निपुण भारत मिशन:
    • उद्देश्य:
      • आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता के सार्वभौमिक अधिग्रहण को सुनिश्चित करने के लिये एक सक्षम वातावरण बनाया जाए ताकि 2026-27 तक प्रत्येक बच्चा ग्रेड 3 तक पढ़ने, लिखने और अंकगणित में वांछित सीखने की क्षमता प्राप्त कर सके।
    • फोकस क्षेत्र:
      • यह स्कूली शिक्षा के मूलभूत वर्षों में बच्चों तक पहुँच प्रदान करने और उन्हें बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करेगा; शिक्षक क्षमता निर्माण; उच्च गुणवत्ता एवं विविध छात्र व शिक्षण संसाधनों/शिक्षण सामग्री का विकास और सीखने के परिणामों को प्राप्त करने में प्रत्येक बच्चे की प्रगति पर नज़र रखना।
    • कार्यान्वयन:
      • NIPUN भारत को स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय द्वारा लागू किया जाएगा।
      • समग्र शिक्षा की केंद्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में राष्ट्रीय-राज्य-ज़िला-ब्लॉक-स्कूल स्तर पर एक पाँच स्तरीय कार्यान्वयन तंत्र स्थापित किया जाएगा।
        • 'समग्र शिक्षा' कार्यक्रम तीन मौजूदा योजनाओं: सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए), राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) और शिक्षक शिक्षा (टीई) को मिलाकर शुरू किया गया था।
        • इस योजना का उद्देश्य स्कूली शिक्षा को प्री-स्कूल से बारहवीं कक्षा तक समग्र रूप से व्यवहार में लाना है।
      • NISHTHA (नेशनल इनिशिएटिव फॉर स्कूल हेड्स एंड टीचर्स होलिस्टिक एडवांसमेंट) के तहत फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी (FLN) के लिये एक विशेष पैकेज NCERT द्वारा विकसित किया जा रहा है।
        • NISHTHA "एकीकृत शिक्षक प्रशिक्षण के माध्यम से स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार" हेतु एक क्षमता निर्माण कार्यक्रम है।
      • पूर्व-प्राथमिक या बालवाटिका कक्षाओं के माध्यम से क्रम में चरण-वार लक्ष्य निर्धारित किये जा रहे हैं।
  • अन्य संबंधित पहलें:

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

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